ज़्यादातर ऐड अकाउंट (ad accounts) इस वजह से ब्लॉक नहीं होते कि वे किस चीज़ का विज्ञापन कर रहे हैं। वे पहला असली कैंपेन चलने से पहले ही दम तोड़ देते हैं, क्योंकि प्लेटफ़ॉर्म साइन-अप के समय ही यह तय कर लेता है कि अकाउंट फ़र्जी (fake) है। मैं सिंगापुर में एक मोबाइल प्रॉक्सी फ़ार्म (mobile proxy farm) चलाता हूँ, और मैं मीडिया बायर्स (media buyers) को बार-बार एक ही गलती करते देखता हूँ: वे हफ़्तों तक अपने क्रिएटिव और लैंडिंग पेज़ को चमकाने में बिताते हैं, और फिर एक फ्लैग (flagged) हो चुकी आईपी से अकाउंट बना लेते हैं। नतीजा? रिव्यू के दौरान सब कुछ खत्म हो जाता है।
यह गाइड उस हिस्से के बारे में है जो असल में यह तय करता है कि आपके अकाउंट बचेंगे या नहीं: फ़ार्मिंग (Farming), वॉर्मिंग अप (Warming up), और इन दोनों के नीचे काम करने वाली नेटवर्क लेयर (Network layer)।
फ़ार्मिंग और वॉर्मिंग अप का असल मतलब क्या है?
इन दो शब्दों को लोग अक्सर आपस में मिला देते हैं।
फ़ार्मिंग (Farming): इसका मतलब है ऐड अकाउंट्स का एक स्टॉक बनाना और उसे बनाए रखना ताकि आपके पास हमेशा स्पेयर (अतिरिक्त) अकाउंट्स मौजूद रहें। इस बिज़नेस में अकाउंट्स ब्लॉक होते ही हैं, यहाँ तक कि बिल्कुल साफ-सुथरे अकाउंट भी। एक अच्छा फ़ार्म किसी बैन (ban) को एक बड़ी आपदा के बजाय महज़ एक छोटी सी परेशानी में बदल देता है।
वॉर्मिंग अप (Warming up): इसका मतलब है किसी बिल्कुल नए अकाउंट से असली पैसे खर्च करने से पहले उसे एक असली इंसान के अकाउंट की तरह व्यवहार कराना। एक नया अकाउंट जो रोज़ लॉग-इन करता है, ब्राउज़ करता है, ग्रुप्स में शामिल होता है और एक हफ़्ते के लिए $5 का कैंपेन चलाता है, वह प्लेटफ़ॉर्म को इंसानी लगता है। इसके विपरीत, एक नया अकाउंट जो पहले ही दिन $500 का आक्रामक ऑफर लाइव कर देता है, वह तुरंत पकड़ा जाता है।
ये दोनों चीज़ें भरोसे (Trust) पर टिकी हैं। और कोई भी प्लेटफ़ॉर्म सबसे पहला भरोसा आपकी आईपी एड्रेस (IP address) को देखकर तय करता है।
प्लेटफ़ॉर्म सबसे पहले आईपी (IP) की जांच क्यों करते हैं?
इससे पहले कि फेसबुक या टिकटॉक आपके क्रिएटिव या पेमेंट मेथड को देखें, वे यह देखते हैं कि आप कहाँ से कनेक्ट हो रहे हैं। आईपी को भरोसे के हिसाब से तीन कैटेगरी में बांटा गया है:
डेटासेंटर आईपी (Datacenter IPs) - सबसे नीचे: ये होस्टिंग कंपनियों की होती हैं, और कोई भी असली यूज़र सर्वर रैक से ब्राउज़िंग नहीं करता। प्लेटफ़ॉर्म्स के पास इन रेंजेस की पूरी लिस्ट होती है, इसलिए इनसे बना कोई भी नया ऐड अकाउंट शुरुआत से ही शक के दायरे में आ जाता है।
रेजिडेंशियल आईपी (Residential IPs) - बेहतर: ये घरेलू इंटरनेट कनेक्शन (जैसे होम वाई-फाई) की होती हैं, इसलिए बेहतर हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि ये मिलती कहाँ से हैं? ज़्यादातर रेजिडेंशियल आईपी पूल संदिग्ध सहमति वाले SDK ट्रैफ़िक से बनते हैं, जो हज़ारों यूज़र्स के बीच शेयर होते हैं और सेशन के बीच में ही बदल (rotate) जाते हैं। आपको कभी नहीं पता होता कि आपसे एक घंटे पहले उस आईपी का किसने गलत इस्तेमाल किया था।
मोबाइल आईपी (Mobile IPs) - सबसे बेस्ट (Top Tier): इसकी वजह है CGNAT। मोबाइल कंपनियों (Carriers) के पास हर फ़ोन के लिए अलग IPv4 एड्रेस नहीं होते, इसलिए किसी भी समय हज़ारों असली यूज़र्स एक ही आईपी शेयर कर रहे होते हैं। अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म किसी Singtel मोबाइल आईपी को बैन करता है, तो वह एक साथ हज़ारों असली यूज़र्स को ब्लॉक कर देगा। इसलिए वे ऐसा नहीं करते। मोबाइल आईपी से आने वाले ट्रैफ़िक को बिना किसी शक के तुरंत भरोसा मिल जाता है।
यही एकमात्र कारण है कि मोबाइल प्रॉक्सी (mobile proxies) वजूद में आए। आप एक तरह से पूरी टेलीकॉम कंपनी के भरोसे को उधार ले रहे होते हैं।
हफ़्ते-दर-हफ़्ते वॉर्म-अप प्लेबुक (The Warm-up Playbook)
दिन 1 से 3: शांत रहें
अकाउंट बनाएं और कोई भी कमर्शियल (बिजनेस) काम न करें। प्रोफाइल को पूरी तरह भरें, फीड स्क्रॉल करें, पेजों को फॉलो करें और रोज़ 15 से 20 मिनट वीडियो देखें। फेसबुक पर धीरे-धीरे कुछ दोस्त जोड़ें। शुरुआती दिन ट्रस्ट स्कोरिंग में सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, इसलिए जितना साधारण रहेंगे, उतना अच्छा है।
दिन 4 से 7: हल्का एंगेजमेंट
अपना फैन पेज या बिजनेस एसेट बनाएं, कुछ ग्रुप्स में शामिल हों और कभी-कभार कमेंट करें। अभी भी कोई विज्ञापन (ads) नहीं चलाना है।
हफ़्ता 2: पहला कैंपेन
इसे छोटा और साफ-सुथरा रखें: $5 से $10 प्रति दिन। कोई व्हाइटहैट (whitehat) ऑफर या साधारण एंगेजमेंट ऑब्जेक्टिव चुनें और इसे बिना बार-बार छेड़छाड़ किए चलने दें। मकसद मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि स्पेंड हिस्ट्री (spend history) बनाना और पहला बिलिंग ट्रांजैक्शन बिना किसी विवाद के क्लियर करना है।
हफ़्ता 3 और 4: धीरे-धीरे स्केल करें
हर दो या तीन दिन में बजट को 20 से 30 प्रतिशत बढ़ाएं और दूसरा कैंपेन जोड़ें। पेमेंट के लिए उसी कार्ड का इस्तेमाल जारी रखें। फीड ब्राउज़ करने से कहीं ज़्यादा आपके ट्रस्ट स्कोर के लिए एक साफ-सुथरा पहला पेमेंट मायने रखता है।
हफ़्ता 5 और आगे: असली काम शुरू करें
अकाउंट अब पुराना हो चुका है, इसकी एक स्पेंड हिस्ट्री है और इसका व्यवहार भी सामान्य है। अब आप अपने असली ऑफर्स की तरफ बढ़ सकते हैं, लेकिन बजट को अचानक बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे ही बढ़ाएं। कुछ बायर्स वॉर्म-अप को छह हफ़्ते तक खींचते हैं, लेकिन मेरे विचार से अगर आईपी पहले दिन से साफ है, तो चार हफ़्ते काफी हैं।
ध्यान दें: यह सब तब तक काम नहीं करेगा जब तक कि आपकी नेटवर्क लेयर मजबूत न हो। और यहीं से शुरू होता है प्रॉक्सी सेटअप का खेल।
अकाउंट फ़ार्म के लिए प्रॉक्सी के नियम
एक अकाउंट, एक आईपी, हमेशा: आपके फ़ार्म के हर अकाउंट का अपना खुद का मोडेम (modem) और समर्पित पोर्ट (dedicated port) होना चाहिए। एक ही आईपी के पीछे पांच अकाउंट चलाएंगे, तो प्लेटफ़ॉर्म उन्हें आपस में लिंक कर देगा और पूरे क्लस्टर को एक साथ बैन कर देगा। शेयर्ड प्रॉक्सी (Shared proxy) तो और भी बदतर है: किसी और की गलतियों का इतिहास आपका इतिहास बन जाता है।
लॉगिन के लिए स्टिकी सेशन, अकाउंट बनाने के लिए रोटेशन: नए अकाउंट बनाते समय, हर साइन-अप के बीच आईपी को रोटेट (बदलें) करें। मोबाइल CGNAT पर एक नई आईपी बिल्कुल स्वाभाविक लगती है। लेकिन एक बार अकाउंट बन जाने के बाद, उसे एक स्टेबल (स्थिर) सेशन से ही लॉग-इन होना चाहिए। अगर सेशन के बीच में आईपी बदलती है, तो प्लेटफ़ॉर्म को लगता है कि कुकी चोरी हुई है।
सब कुछ जियो (Geo/लोकेशन) से मैच करें: आईपी का देश, अकाउंट का देश, ब्राउज़र का टाइमज़ोन, भाषा और पेमेंट कार्ड—सब कुछ एक ही जगह का होना चाहिए। सिंगापुर की आईपी के साथ जर्मनी का टाइमज़ोन और यूएस (US) का कार्ड होना कोई छलावरण नहीं, बल्कि बैन होने का सीधा आमंत्रण है।
जब आप फ़ार्मिंग के लिए मोबाइल प्रॉक्सी प्रोवाइडर चुनते हैं, तो आपकी चेकलिस्ट छोटी होनी चाहिए:
शेयर्ड डिवाइस के बजाय प्रति पोर्ट एक डेडिकेटेड मोडेम।
लिंक या API के ज़रिए ऑन-डिमांड आईपी रोटेशन।
असली कंपनियों के असली सिम कार्ड।
खराब या पुरानी आईपी मिलने पर मोडेम को रीबूट या बदलने का विकल्प।
इसी चेकलिस्ट को ध्यान में रखकर मैंने Singapore Mobile Proxy की शुरुआत की थी। हमारा हर पोर्ट एक फिजिकल 4G/5G मोडेम है जिसमें Singtel, M1, StarHub या Vivifi का सिम कार्ड लगा होता है। इसका मतलब है कि आपके अकाउंट उसी आईपी स्पेस पर काम करते हैं जिसका इस्तेमाल रोज़ लाखों असली सिंगापुरी करते हैं। अगर आप APAC (एशिया-पैसिफिक) कैंपेन चलाते हैं या आपको साफ-सुथरी सिंगापुर लोकेशन चाहिए, तो यह बिल्कुल उसी के लिए है।
बाकी का सेटअप: एंटीडिटेक्ट और रिसर्च
प्रॉक्सी आपके नेटवर्क की पहचान को ठीक करती है, लेकिन आपके ब्राउज़र की पहचान को भी उसी अनुशासन की ज़रूरत होती है।
एंटीडिटेक्ट ब्राउज़र (Antidetect Browser): हर अकाउंट के लिए एक अलग प्रोफाइल का इस्तेमाल करें। अकाउंट बैन होने के बाद उस प्रोफाइल का दोबारा कभी इस्तेमाल न करें। डिजिटल फिंगरप्रिंट (Fingerprint) भी अकाउंट के साथ ही खत्म हो जाता है।
रिसर्च लेयर: आपका वॉर्म-अप कैंपेन आपके टारगेट मार्केट और जियो (location) के बाकी विज्ञापनों जैसा ही दिखना चाहिए, न कि कुछ अलग। Spy.House जैसा स्पाई टूल आपको दिखाता है कि आपके मार्केट में पहले से क्या चल रहा है और क्या कन्वर्ट हो रहा है। इससे वॉर्म-अप फेज़ के लिए सुरक्षित और नेटिव दिखने वाले क्रिएटिव चुनना आसान हो जाता है।
एक सफल फ़ार्म का फॉर्मूला: प्रति अकाउंट = एक मोबाइल प्रॉक्सी पोर्ट + एक एंटीडिटेक्ट प्रोफाइल + एक रिसर्च किया हुआ क्रिएटिव एंगल।
गलतियां जो पूरे फ़ार्म को बर्बाद कर देती हैं
एक ही आईपी के पीछे कई अकाउंट चलाना (वे आपस में लिंक होकर एक साथ बैन हो जाते हैं)।
यह सोचकर सस्ती डेटासेंटर आईपी पर वॉर्म-अप करना कि मोबाइल प्रॉक्सी पर बाद में स्विच कर लेंगे (भरोसा साइन-अप के समय ही तय हो जाता है)।
तीसरे ही दिन बजट स्केल कर देना क्योंकि अकाउंट "ठीक लग रहा है" (रिव्यू आमतौर पर पहले बड़े स्पेंड स्पाइक पर आता है, पहले विज्ञापन पर नहीं)।
आईपी, टाइमज़ोन और कार्ड के बीच जियो (लोकेशन) का मिसमैच होना।
वॉर्म-अप के दौरान रात के 3 बजे पागलों की तरह कैंपेन में बदलाव करना (यह बॉट या ऑटोमेशन जैसा व्यवहार लगता है)।
बैन हो चुके अकाउंट्स के ब्राउज़र प्रोफाइल या पेमेंट कार्ड का दोबारा इस्तेमाल करना।
लागत का सही गणित
मोबाइल प्रॉक्सी सबसे महंगे प्रॉक्सी प्रकार हैं—और चूंकि मैं इन्हें बेचता हूँ, इसलिए आप मेरी बात को थोड़ा पक्षपाती मान सकते हैं। लेकिन गणित सीधा है:एक डेडिकेटेड मोबाइल पोर्ट की महीने की कीमत, एक डेटासेंटर आईपी की साल भर की कीमत से ज़्यादा होती है। लेकिन एक बैन हुआ अकाउंट, जिसमें $2,000 की स्पेंड हिस्ट्री, पुराना पिक्सेल (pixel) और काम करने वाला पेमेंट प्रोफाइल हो, उसकी कीमत इस प्रॉक्सी से कहीं ज़्यादा है—और आप उसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं खरीद सकते। वॉर्म-अप में बचने वाला सिर्फ एक अकाउंट अपनी प्रॉक्सी की कीमत कई गुना वसूल कर देता है।
महंगे अकाउंट्स के नीचे सस्ता इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना, पैसे बचाने की गलत जगह है।
संक्षेप में
भरोसा धीरे-धीरे बनता है और पल भर में खत्म हो जाता है। अकाउंट्स की ज़रूरत पड़ने से पहले ही उनकी फ़ार्मिंग शुरू करें, हफ़्तों के शेड्यूल के हिसाब से हर एक को वॉर्म-अप करें, प्रति डेडिकेटेड मोबाइल पोर्ट एक ही अकाउंट रखें, और अपनी जियो (लोकेशन) को शुरू से अंत तक मैच करें। जो बायर्स अकाउंट इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने फनल जितना ही गंभीरता से लेते हैं, वे तब भी काम कर रहे होते हैं जब बाकी लोग बैन के खिलाफ अपील कर रहे होते हैं।
अगर आप अपने फ़ार्म के लिए असली सिंगापुर मोबाइल आईपी आज़माना चाहते हैं, तो Spy.House के पाठकों को प्रोमो कोड SPYHOUSE10 का इस्तेमाल करने पर Singapore Mobile Proxy पर उनके पहले पेमेंट पर 10% की छूट मिलेगी। अगर आप पहले आईपी की क्वालिटी टेस्ट करना चाहते हैं, तो एक फ्री ट्रायल भी उपलब्ध है।
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